अतिश्योक्ति अलंकार की परिभाषा और उदाहरण


अतिश्योक्ति का अर्थ होता है उक्ति में अतिशयता का समावेश अर्थात किसी बात को बढ़ा चढ़ा का करना। इस लेख में हम अतिश्योक्ति अलंकार की परिभाषा तथा अतिश्योक्ति अलंकार के उदाहरण के बारे में पढ़ने वाले हैं।

अतिश्योक्ति अलंकार की परिभाषा

जिस अलंकार में किसी वस्तु के बारे में बड़ा चढ़ा कर वर्णन किया जाता है अथवा किसी बात को बड़ा चढ़ा कर बताया जाता है जिससे सामान्य लोक समाज की सीमाओं को भी पर कर दिया जाए वहाँ पर अतिश्योक्ति अलंकार होता है।

अतिश्योक्ति अलंकार में उपमान और उपमेय का समान कथन ना होकर केवल उपमान का ही वर्णन किया जाता है।

अतिश्योक्ति अलंकार के उदाहरण

हनुमान की पूंछ में लगन न पायी आगि।

सगरी लंका जल गई , गये निसाचर भागि।।

उपर्युक्त दिए गए काव्य में बताया गया है कि लंका में हनुमान जी के पूछ में तो आग लगाई गई परन्तु वह आग उनके पूछ में न लगकर पूरी लंका में लग गई है जिससे सम्पूर्ण लंका जल चुकी है तथा सभी और दैत्य यहाँ से वहाँ भाग रहे हैं।

भूप सहस दस एकहिं बारा।

लगे उठावन टरत न टारा।।

उपर्युक्त दिए गए वाक्य में बताया गया है कि जब धनुर्भग हो रहा था तो जब वह किसी से नही उठावतो एक साथ दस हजार राजा

इस लेख में हमने आपको अतिश्योक्ति अलंकार के बारे में उदाहरण सहित सम्पूर्ण जानकारी दी है यदि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे आगे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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