अनुप्रास अलंकार की परिभाषा, प्रकार एवं उदाहरण


अनुप्रास अलंकार, शब्दालंकार के सबसे महत्वपूर्ण प्रकार में से एक है अनुप्रास अलंकार का निर्माण दो शब्द अनु और प्रास से मिलकर होता है। इस लेख मे आप अनुप्रास अलंकार की परिभाषा तथा अनुप्रास अलंकार के प्रकार के बारे में उदाहरण सहित पढ़ने वाले हैं, अतः इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

अनुप्रास अलंकार की परिभाषा

अनुप्रास अलंकार की उत्तपत्ति अनु और प्रास दो शब्दों से मिलकर हुई है। यहाँ पर अनु का अर्थ होता है बार – बार तथा प्रास का अर्थ होता है वर्ण।

अर्थात जब किसी वाक्य में कोई वर्ण बार – बार प्रयोग में आता है अथवा किसी वर्ण की आवर्त्ति होती है, वहाँ पर अनुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण –

तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।

उपर्युक्त दिए गए उदाहरण में त शब्द की आवर्त्ति हुई है तथा इसका वर्ण का प्रयोग कई बार किया गया है अतः यहाँ पर अनुप्रास अलंकार है।

अनुप्रास के अलंकार प्रकार

अनुप्रास अलंकार के पॉंच प्रकार होते हैं जो कि निम्नलिखित है।

  • छेकानुप्रास
  • वृत्यानुप्रास
  • श्रुत्यनुप्रास
  • अन्त्यानुप्रास
  • लाटानुप्रास

1. छेकानुप्रास

ऐसे वाक्य जहाँ पर क्रम तथा स्वरुप से अनेक व्यंजनों की आवर्त्ति एक बार ही होती है, वहाँ पर छेकानुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण –

रीझि रीझि रहसि रहसि हँसि हँसि उठै।

साँसैं भरि आँसू भरि कहत दई दई।

उपर्युक्त वाक्य में रीझि रीझि, रहसि रहसि तथ हँसि हँसि शब्दो की आवर्त्ति एक एक बार हुई है अतः यह अनुप्रास का उदाहरण है।

2. .वृत्यानुप्रास

जब वाक्य में किसी व्यंजन की आवर्त्ति बार बार हो तो वहाँ पर वृत्यानुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण –

सेस महेस गनेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरन्तर गावैं।

3.श्रुत्यनुप्रास

जब काव्य में मधुर सुनाई देने वाले अथवा कानो को मधुर लगने वाले वर्णो की आवर्त्ति होती है तो उस अलंकार को श्रुत्यनुप्रास अलंकार कहते हैं।

उदाहरण –

दिनान्त था, थे दीननाथ डुबते,

सधेनु आते गृह ग्वाल बाल थे।

4.अन्त्यानुप्रास

ऐसे अलंकार जिन वाक्यों के अंत मे तुक अथवा सुर का मिलान होता है उस अलंकार को अन्त्यानुप्रास अलंकार कहते हैं।

उदाहरण –

लगा दी किसने आकर आग।

कहाँ था तू संशय के नाग।।

5. लाटानुप्रास

जब वाक्य तथा शब्दो की आवर्त्ति एक साथ होती है तथा प्रत्येक बार उसका वही अर्थ प्रकट हो इस प्रकार के अलंकार को लटानुप्रास अलंकार कहते हैं।

उदाहरण –

पराधीन जो जन, नहीं स्वर्ग ता हेतु।

पराधीन जो जन नहीं, स्वर्ग नरक ता हेतु।।

इस आर्टिकल में आपको अनुप्रास अलंकार तथा उसके प्रकार के बारे में उदाहरण सहित सम्पूर्ण जानकारी दी गई है यदि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे आगे जरूर शेयर करें।

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