गीतिका छंद की परिभाषा एवं उदाहरण


गीतिका छंद एक सम मात्रिक छन्द है इस लेख में हम आपको गीतिका छंद की परिभाषा तथा गीतिका छन्द के उदाहरण के बारे में बताने जा रहे हैं। गीतिका छंद के बारे में सम्पूर्ण जानकारी के लिये इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

गीतिका छंद की परिभाषा

गीतिका छंद में चार चरण होते हैं, तथा इसके प्रत्येक चरण में 14 तथा 12 के क्रम में कुल 26 मात्राएँ पाई जाती हैं तथा इसके चरणों के अंत मे गुरु स्वर और लघु स्वर होते हैं।

गीतिका छंद के उदाहरण

हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिये।

शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये।

लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बने।

ब्रह्मचारी, धर्मरक्षक वीर व्रतधारी हम बनें।

खोजते हैं साँवरे को,हर गली हर गाँव में।

आ मिलो अब श्याम प्यारे,आमली की छाँव में।।

आपकी मन मोहनी छवि,बाँसुरी की तान जो।

गोप ग्वालों के शरीरोंं,में बसी ज्यों जान वो।।

उपर्युक्त दिए गए छन्द में चार चरण दिए गए हैं जिसमे 14 तथा 12 के क्रम में कुल 26 मात्राएँ है अतः यह एक गीतिका छन्द का उदाहरण है।

आज के इस आर्टिकल में हमने आपको गीतिका छन्द के बारे में उदाहरण सहित पूरी जानकारी दी है यदि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे आगे जरूर शेयर करें।

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