भ्रांतिमान अलंकार की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण


भ्रांतिमान का अर्थ होता है भ्रम, अर्थात जहाँ पर भ्रम होने की संभावना अथवा भाव होता है वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है, अब हम भ्रांतिमान अलंकार की परिभाषा तथा उदाहरण के बारे में पढ़ने जा रहे हैं। भ्रांतिमान अलंकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिल जाएगी।

भ्रांतिमान अलंकार की परिभाषा

जिस अलंकार में उपमेय में उपमान के होने का भ्रम अथवा सम्भावना होती है वहाँ पर भ्रांतिमान अलंकार होता है। अर्थात जब एक वस्तु को देखने पर दूसरी वस्तु से सम्बंधित भ्रम उत्पन्न हो जाता है वह भ्रांतिमान अलंकार कहलाता है। भ्रांतिमान अलंकार को उभयालंकार का एक अंग भी माना जाता है।

भ्रांतिमान अलंकार के उदाहरण

ओस बिन्दु चुग रही हंसिनी मोती उनको जान।

उपरोक्त दिए गए वाक्य में हंसनी को ओस की बूंदों के कारण मोतियों का भ्रम उत्पन्न हो गया है तथा वह उस की बूंदों को मोती समझ कर चुग (ग्रहण) कर रही हैं।

जानि स्याम को स्याम-घन नाचि उठे वन मोर।

ऊपर दिए गए वाक्य में मोर श्री कृष्ण को सदृश्य के कारण श्याम मेघ ( काले बादल ) समझ रहे हैं तथा श्याम के काले रंग के कारण मोरो को काले बादलो का भ्रम हो गया है।

इस लेख में हमने आपको भ्रांतिमान अलंकार के बारे में उदाहरण सहित सम्पूर्ण जानकारी दी गई है यदि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे आगे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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