स्वभावोती अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण


स्वभावोती अलंकार, अर्थालंकार का भेद होता है शोभावती का अर्थ होता है स्वभाविक वर्णन। इस आर्टिकल में हम स्वभावोती अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण के बारे में जानेंगे इस अलंकार की संपूर्ण जानकारी आपको यहाँ पर मिल जाएगी।

स्वभावोती अलंकार की परिभाषा

जब किसी वस्तु का स्वाभाविक वर्णन किया जाता है तो वहाँ स्वभावोती अलंकार होता है।

स्वभावोती अलंकार का उदाहरण

मोर मुकुट कटि काछनी कर मुरली उर माल। 

यहि बानिक मो मन बसौ सदा बिहारीलाल।।

इस दोहे में कवि विहारी लाल जी कहते है कि हे कान्हा तुम्हारे सिर पर मोर का मुकुट हो, तुम्हारे गले मे माला हो, तुम्हारे हाथ मे मुरली हो और तुम जी पीली धोती पहनकर रखते हो तुम्हारा यह रूप मेरे मन मे हमेशा बसा रहता है।

आज के इस आर्टिकल में हमने आपको स्वभावोती अलंकार के बारे में उदाहरण सहित समस्त जानकारी प्रदान की है यदि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे आगे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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