100+ Muharram Quotes & Wishes in Hindi | मुहर्रम विशेज इन हिंदी


Muharram Quotes & Wishes in Hindi: आज के इस लेख में आपके लिए मुहर्रम विशेज इन हिंदी लेके आए है। इस तरह की मुहर्रम विशेज इन हिंदी आपको मिलना मुश्किल है। आप यह लेख अपने मित्रो के साथ साझा कर सकते हैं।

Muharram Quotes & Wishes in Hindi

फिर आज हक़ के लिए जान फिदा करे कोई,
वफ़ा भी झूम उठे यूँ वफ़ा करे कोई,
नमाज़ 1400 सालों से इंतज़ार में है,
हुसैन की तरह मुझे फिर अदा करे कोई।

कर्बला को कर्बला के शहंशाह पर नाज है,
उस नवासे पर मुहम्मद को नाज है,
यूँ तो लाखों सिर झुके सजदे में लेकिन,
हुसैन ने वो सजदा किया जिस पर खुदा को नाज है।

कर्बला की कहानी में कत्लेआम था,
लेकिन हौंसलों के आगे हर कोई गुलाम था,
खुदा के बन्दे ने शहीद की कुर्बानी दी,
इसलिए उसका नाम पैगाम बना।

खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने,
रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने,
खुद को तो एक बूंद भी मिल ना सका पानी,
लेकिन कर्बला को खून पिलाया हुसैन ने।

हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
ये आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है,
सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है अर्श वाला,
तू धीरे गुजर यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है।

एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी जमीन,
है मेरे नसीब में परचम हुसैन का,
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख,
होता है पर भी मातम हुसैन का।

क्या सिर्फ मुसलमान के प्यारे हैं हुसैन,
चरखे नौ ए बशर के तारे हैं हुसैन,
इनसान को बेदार तो हो लेने दो,
हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन।

क्‍या हक अदा करेगा ज़माना हुसैन का,
अब तक ज़मीन पर कर्ज़ है सजदा हुसैन का,
झोली फैलाकर मांग लो मुमीनो,
हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का।

न हिला पाया वो रब की मैहर को भले जात गया,
वो कायर जंग पर जो मौला के दर पर,
बैखोफ शहीद हुआ वही था असली और सच्चा पैगम्बर।

क्या हक़ अदा करेगा ज़माना हुसैन का,
अब तक ज़मीन पे क़र्ज़ है सजदा हुसैन का,
झोली फैला कर मांग लो मोमिनो,
हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का।

वो जिसने अपने नाना का वादा वफ़ा कर दिया,
घर का घर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया,
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम,
उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम।

यूं ही नहीं जहान में चर्चा हुसैन का,
कुछ देख के हुआ था ज़माना हुसैन का,
सर दे के जो जहां की हुकूमत खरीद ली,
महंगा पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का।

नया साल मुबारक हो तुम्हें ऐ ख़ुदा वालों,
हो मुबारक माहे मुहर्रम तुम्हें ऐ नबी वालों,
मिले सड़क ऐ पंजतन सदका ऐ हुसनैन मिले,
तुम पाओ दीनो दुनिया की हर नेअमत दीन वालों।

करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने,
ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने,
लहू जो बह गया कर्बला में,
उनके मकसद को समझो तो कोई बात बने।

आंखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे,
ताबीर में इमाम का जलवा दिखायी दे,
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी एक छोटा सा जरा दिखायी दे।

चढ़ा है चांद फलक पर मनाओ आशूरा,
महीना गम का है मोमिनों मनाओ आशूरा,
बरस रही हैं ये आंखें तुम्हारे गम में हुसैन,
दिल कह रहा है तड़प कर मनाओ आशूरा।

क्या जलवा कर्बला में दिखाया हुसैन ने,
सजदे में जा कर सिर कटाया हुसैन ने,
नेजे पे सिर था और ज़ुबान पे आयतें,
कुरान इस तरह सुनाया हुसैन ने।

यूँ ही नहीं जहाँ में चर्चा हुसैन का,
कुछ देख के हुआ था ज़माना हुसैन का,
सर दे के जो जहाँ की हुकूमत खरीद ले,
महंगा पड़ा यज़ीद को सौदा हुसैन का।

सिर गैर के आगे ना झुकाने वाला,
और नेजे पे भी कुरान सुनाने वाला इस्लाम से क्या पूछते हो,
कौन हुसैन हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला।

ज़िक्र-ए-हुसैन आया तो आंखें छलक पड़ी,
पानी को कितना प्यार है अब भी हुसैन से।

दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया,
जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया,
हर जर्रे को नज़फ का नगीना बना दिया,
हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया।

नज़र गम है नज़रों को बड़ी तकलीफ होती है,
बगैर उनके नज़रों को बड़ी तकलीफ होती है,
नबी कहते थे अकसर के अकसर ज़‍िक्र-ए-हैदर से,
मेरे कुछ जान निसारों को बड़ी तकलीफ होती है।

वो जिसने अपने नाना का वादा वफ़ा कर दिया,
घर का घर सुपुर्द-इ-खाक कर दिया,
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम,
उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम।

मुहर्रम को याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाईº असल जिंदगानी।

पानी का तलब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत,
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर।

एक दिन बड़े ग़रूर एक दिन बड़े ग़रूर से कहने लगी,
जमीन आया मेरे नसीब में परचम हुसैन का,
फिर चांद ने कहा मेरे सीने के दाग देख होता है,
आसमान पे भी मातम हुसैन का।

कर्बला की शाहदत इस्लाम बन गई,
खून तो बहा था लेकिन हौशालो की उडान बन गई।

कौन भूलेगा वो सजदा हुसैन का,
खंजरों तले भी सिर झुका न था हुसैन का,
मिट गई नस्ल ए यजीद कर्बला की खाक में,
कयामत तक रहेगा जमाना हुसैन का।

हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है,
गुरूर टूट गया कोई मर्तबा न मिला,
सितम के बाद भी कुछ हासिल जफा न मिला,
सिर-ऐ-हुसैन मिला है यजीद को लेकिन,
शिकस्त यह है की फिर भी झुका हुआ न मिला।

अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से,
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से,
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है,
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से।

शदीदन-ए-कर्बला के हौसले थे दीद के क़ाबिल,
वहां पर शुक्र करते थे जहाँ पर सब्र मुश्किल था।

तरीका मिसाल असी कोई दोंड के लिए,
सर तन से जुड़ा भी हो मगर मौत न आये,
सोचन मैं सबर ओ राजा के जो मफिल,
एक हुसैन रा अब अली रा जैन मैं आये।

मुहर्रम पर याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाई असल जिंदगानी।

मेरी दुआ है कि यह नववर्ष,
आपके जीवन में बहुत सारी खुशियां,
स्वास्थ्य और समृद्धि लाए,
नया साल 2022 मुबारक आपको।

दिन रोता है रात रोती है,
हर मोमिन की जात रोती है,
जब भी आता है मुहर्रम का महिना,
खुदा की कसम ग़म-ए-हुसैन,
सारीº कायनात रोती है।

इमाम का हौसला इस्लाम जगा गया,
अल्लाह के लिए उसका फर्ज आवाम को धर्म सिखा गया।

सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गई,
सब्र से उम्‍मत को ज़िंदगी मिल गई,
एक चमन फातिमा का गुज़रा,
मगर सारे इस्‍लाम को ज़िंदगी मिल गई।

खुशियों का सफर तो गम से शुरू होता है,
हमारा तो नया साल मुहर्रम से शुरू होता है।

कौन भूलेगा वो सजदा हुसैन का,
खंजरों तले भी सिर झुका न था हुसैन का,
मिट गई नस्ल ए यजीद कर्बला की खाक में,
कयामत तक रहेगा ज़माना हुसैन का।

ऐसी नमाज़ कौन पढ़ेगा जहां,
सजदा किया तो सर ना उठाया हुसैन ने,
सब कुछ खुदा की राह में कुर्बान कर दिया,
असग़र सा फूल भी ना बचाया हुसैन ने।

जन्‍नत की आरज़ू में कहां जा रहे हैं लोग,
जन्‍नत तो करबला में खरीदी हुसैन ने,
दुनिया-ओ-आखरात में जो रहना हो चैन से,
जीना अली से सीखो मरना हुसैन से।

पानी का तलब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत,
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर।

दश्त-ऐ बाला को अर्श का जीना बना दिया,
जंगल को मोहम्मद का मदीना बना दिया,
हर जर्रे को नजफ का नगीना बना दिया,
हुसैन तुमने मरने को इस दुनिया में जीना बना दिया।

नज़र गम है नज़रों को बड़ी तकलीफ होती है,
बगैर उनके नज़रों को बड़ी तकलीफ होती है,
नबी कहते थे अकसर के अकसर ज़‍िक्र-ए-हैदर से,
मेरे कुछ जान निसारों को बड़ी तकलीफ होती है।

वो जिसने अपने नाना का वादा वफ़ा कर दिया,
घर का घर सुपुर्द-इ-खाक कर दिया,
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम,
उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम।

मुहर्रम को याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाईº असल जिंदगानी।

पानी का तलब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत,
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर।

एक दिन बड़े ग़रूर एक दिन बड़े ग़रूर से कहने लगी,
जमीन आया मेरे नसीब में परचम हुसैन का,
फिर चांद ने कहा मेरे सीने के दाग देख होता है,
आसमान पे भी मातम हुसैन का।

कर्बला की शाहदत इस्लाम बन गई,
खून तो बहा था लेकिन हौशालो की उडान बन गई।

कौन भूलेगा वो सजदा हुसैन का,
खंजरों तले भी सिर झुका न था हुसैन का,
मिट गई नस्ल ए यजीद कर्बला की खाक में,
कयामत तक रहेगा जमाना हुसैन का।

हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है,
गुरूर टूट गया कोई मर्तबा न मिला,
सितम के बाद भी कुछ हासिल जफा न मिला,
सिर-ऐ-हुसैन मिला है यजीद को लेकिन,
शिकस्त यह है की फिर भी झुका हुआ न मिला।

अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से,
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से,
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है,
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से।

शदीदन-ए-कर्बला के हौसले थे दीद के क़ाबिल,
वहां पर शुक्र करते थे जहाँ पर सब्र मुश्किल था।

तरीका मिसाल असी कोई दोंड के लिए,
सर तन से जुड़ा भी हो मगर मौत न आये,
सोचन मैं सबर ओ राजा के जो मफिल,
एक हुसैन रा अब अली रा जैन मैं आये।

मुहर्रम पर याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाई असल जिंदगानी।

मेरी दुआ है कि यह नववर्ष,
आपके जीवन में बहुत सारी खुशियां,
स्वास्थ्य और समृद्धि लाए,
नया साल 2022 मुबारक आपको।

दिन रोता है रात रोती है,
हर मोमिन की जात रोती है,
जब भी आता है मुहर्रम का महिना,
खुदा की कसम ग़म-ए-हुसैन,
सारीº कायनात रोती है।

इमाम का हौसला इस्लाम जगा गया,
अल्लाह के लिए उसका फर्ज आवाम को धर्म सिखा गया।

सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गई,
सब्र से उम्‍मत को ज़िंदगी मिल गई,
एक चमन फातिमा का गुज़रा,
मगर सारे इस्‍लाम को ज़िंदगी मिल गई।

खुशियों का सफर तो गम से शुरू होता है,
हमारा तो नया साल मुहर्रम से शुरू होता है।

कौन भूलेगा वो सजदा हुसैन का,
खंजरों तले भी सिर झुका न था हुसैन का,
मिट गई नस्ल ए यजीद कर्बला की खाक में,
कयामत तक रहेगा ज़माना हुसैन का।

ऐसी नमाज़ कौन पढ़ेगा जहां,
सजदा किया तो सर ना उठाया हुसैन ने,
सब कुछ खुदा की राह में कुर्बान कर दिया,
असग़र सा फूल भी ना बचाया हुसैन ने।

जन्‍नत की आरज़ू में कहां जा रहे हैं लोग,
जन्‍नत तो करबला में खरीदी हुसैन ने,
दुनिया-ओ-आखरात में जो रहना हो चैन से,
जीना अली से सीखो मरना हुसैन से।

पानी का तलब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत,
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर।

दश्त-ऐ बाला को अर्श का जीना बना दिया,
जंगल को मोहम्मद का मदीना बना दिया,
हर जर्रे को नजफ का नगीना बना दिया,
हुसैन तुमने मरने को इस दुनिया में जीना बना दिया।

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